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Rishabh Pant Ancestral Village: पैतृक गांव में पुराने मकान का पुनर्निर्माण शुरू, उत्तराखंड लौटने की तैयारी में क्रिकेटर

Rishabh Pant Ancestral Village: भारतीय क्रिकेट स्टार ऋषभ पंत के उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव से बड़ी खबर सामने आई है। पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र के पाली आमडाली गांव में ऋषभ पंत के पुराने पैतृक मकान का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। मकान के दोबारा तैयार होने की खबर से गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि घर का निर्माण पूरा होने के बाद ऋषभ पंत अपने बचपन से जुड़े इस गांव में पहले की तुलना में अधिक समय बिताएंगे।

पंत का परिवार लंबे समय से उत्तराखंड की अपनी जड़ों से जुड़ा रहा है। ऐसे में पैतृक मकान का पुनर्निर्माण उनके परिवार के लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Rishabh Pant Ancestral Village में शुरू हुआ मकान का निर्माण

ग्रामीणों के अनुसार, ऋषभ पंत की मां सरोज पंत करीब दो दशक बाद 4 अगस्त को पाली आमडाली गांव पहुंचीं। वह करीब पांच दिन गांव में रहीं और इस दौरान पुराने मकान की स्थिति देखने के साथ उसके पुनर्निर्माण के लिए ठेकेदार की तलाश की।

पुराना मकान काफी समय से जर्जर स्थिति में था। अब उसके पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि आने वाले समय में यह मकान पंत परिवार के लिए फिर से एक महत्वपूर्ण ठिकाना बन सकता है।

ऋषभ पंत के चाचा और पाली गांव निवासी मदन मोहन पंत ने भी मकान के पुनर्निर्माण की पुष्टि की है।

बचपन में गांव में बिताया था समय

ऋषभ पंत का उत्तराखंड के इस गांव से पुराना और भावनात्मक रिश्ता है। ग्रामीणों के अनुसार, पंत के दादा करीब 60 वर्ष पहले रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर रुड़की में बस गए थे।

करीब 20 वर्ष पहले वह परिवार के सदस्यों के साथ पाली आमडाली गांव आए थे। उस समय ऋषभ पंत की उम्र लगभग सात वर्ष थी। बचपन में उन्होंने गांव में कुछ समय बिताया था।

यही वजह है कि पंत परिवार के पैतृक मकान का पुनर्निर्माण ग्रामीणों के लिए भी खास महत्व रखता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋषभ का गांव से दोबारा जुड़ना क्षेत्र के लिए गर्व की बात होगी।

उत्तराखंड में अपना बेस शिफ्ट करना चाहते हैं ऋषभ पंत

Rishabh Pant Ancestral Village में मकान के पुनर्निर्माण की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब ऋषभ पंत ने हाल ही में उत्तराखंड में अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने की इच्छा जाहिर की थी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्य में जमीन खरीदने में मदद करने की अपील की थी। पंत ने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि वह उत्तराखंड लौटना चाहते हैं और दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड स्थानांतरित करना चाहते हैं।

उनकी इस इच्छा के बाद उत्तराखंड सरकार की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई थी।

मुख्यमंत्री ने बताया था उत्तराखंड का गौरव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषभ पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा था कि सरकार नियमों के तहत उन्हें हरसंभव सहयोग करेगी।

सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को ऋषभ पंत से संपर्क करने की बात भी कही गई थी। इसके बाद अब उनके पैतृक गांव में पुराने मकान का पुनर्निर्माण शुरू होना इस बात को और खास बनाता है कि पंत का उत्तराखंड से जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है।

Rishabh Pant Ancestral Village से युवाओं को मिलेगी प्रेरणा

पाली आमडाली के ग्राम प्रधान विनोद कुमार ने कहा कि यदि मकान बनने के बाद ऋषभ पंत गांव में नियमित रूप से आते-जाते हैं तो इसका स्थानीय युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ऋषभ पंत की सफलता पहाड़ी क्षेत्र के युवाओं के लिए पहले से ही प्रेरणा का स्रोत है। गांव से उनका जुड़ाव और यहां उनका आना-जाना नई पीढ़ी को अपने क्षेत्र और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित कर सकता है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पंत की मौजूदगी से गांव और आसपास के क्षेत्र को भी नई पहचान मिल सकती है।

पैतृक घर का पुनर्निर्माण जड़ों से जुड़ाव का संकेत

ऋषभ पंत के एक अन्य चाचा ललित पंत ने कहा कि पैतृक मकान का पुनर्निर्माण परिवार के अपनी जड़ों और पहाड़ से जुड़ाव को दर्शाता है।

उनके अनुसार, ऋषभ पंत का अपने पैतृक गांव से जुड़ना केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पिथौरागढ़ और पूरे पहाड़ी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश है।

एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टार का अपने पैतृक गांव और पहाड़ से जुड़ाव स्थानीय लोगों में गर्व की भावना पैदा कर रहा है।

गांव में खुशी का माहौल

मकान के पुनर्निर्माण की खबर सामने आने के बाद पाली आमडाली गांव के लोगों में उत्साह है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि निर्माण पूरा होने के बाद ऋषभ पंत खुद भी गांव आएंगे और अपने बचपन से जुड़े स्थानों को समय देंगे।

Rishabh Pant Ancestral Village अब सिर्फ ऋषभ पंत के परिवार की पैतृक पहचान नहीं, बल्कि उनके प्रशंसकों और स्थानीय युवाओं के लिए भी खास आकर्षण बनता जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि पंत का गांव से जुड़ाव पहाड़ की संस्कृति, युवाओं और अपनी जड़ों के प्रति लगाव का मजबूत उदाहरण बन सकता है।

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