अजमेर में उर्स के अवसर पर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर तिरंगे के रंग की चादर चढ़ाई गई
28..dec..अजमेर, राजस्थान। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ दरगाह में आस्था, भाईचारे और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। उर्स के पावन अवसर पर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर तिरंगे के रंगों वाली विशेष चादर चढ़ाई गई, जिसने देशभर से आए जायरीनों और श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
उर्स के दौरान चादर पेश करने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीन पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, कव्वालियों और नात-ए-पाक के साथ दरगाह पहुंचे। इसी क्रम में तिरंगे के रंग की चादर चढ़ाई गई, जिसे देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बताया गया। चादर पेश करने वालों ने कहा कि ख्वाजा साहब का संदेश हमेशा प्रेम, शांति और मानवता का रहा है, और तिरंगा भी इन्हीं मूल्यों का प्रतीक है।
दरगाह परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और दरगाह कमेटी की ओर से जायरीनों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए, ताकि उर्स के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह में मत्था टेकने पहुंचे और देश में अमन-चैन, तरक्की और भाईचारे की दुआएं मांगीं।
उर्स के मौके पर कव्वालियों की महफिलें सजीं, जिनमें सूफियाना कलाम के जरिए ख्वाजा गरीब नवाज की शान बयान की गई। रात भर चलने वाली इन महफिलों में दूर-दराज से आए जायरीन शामिल हुए। दरगाह परिसर में लंगर का भी आयोजन किया गया, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी को भोजन कराया गया।
स्थानीय लोगों और जायरीनों का कहना है कि तिरंगे के रंग की चादर चढ़ाया जाना इस बात का संदेश है कि सूफी परंपरा हमेशा देश को जोड़ने का काम करती रही है। उर्स का यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश करता है।

