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जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर: पत्नी ने किया विरोध, बोली- संपत्ति मेरे नाम पर है

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त अभियान के तहत कथित तौर पर नशा तस्करी के मामलों से जुड़े एक ढाबे पर कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बाद की गई है, जबकि ढाबा मालिक की पत्नी ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बताया जा रहा है कि यह ढाबा “वीर दा ढाबा” के नाम से जाना जाता है और इसका संबंध धर्मेंद्र सिंह नामक व्यक्ति से जोड़ा जा रहा है, जिसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मामले दर्ज बताए गए हैं। हालांकि परिवार का दावा है कि संपत्ति और ढाबे का संचालन पत्नी के नाम पर है।

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई?

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर चलाने के पीछे प्रशासन ने अवैध निर्माण को मुख्य कारण बताया है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार ढाबे के निर्माण में भवन नियमों का उल्लंघन किया गया था। इसी संबंध में पहले नोटिस जारी किया गया था और संबंधित पक्ष को जवाब देने के लिए समय भी दिया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित अवधि के भीतर कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए अवैध हिस्से को हटाने का निर्णय लिया गया। नगर निगम की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई को अंजाम दिया।

प्रशासन का दावा है कि यह कदम नियमों के अनुसार उठाया गया है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई बिना नोटिस के नहीं की गई।

पत्नी ने बुलडोजर कार्रवाई का किया विरोध

संपत्ति मेरे नाम पर है: रज्जी

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर चलाए जाने के दौरान धर्मेंद्र सिंह की पत्नी रज्जी ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। रज्जी का कहना है कि ढाबे की रजिस्ट्री उसके नाम पर है और व्यवसाय चलाने के लिए उसके पास आवश्यक दस्तावेज और अनुमति भी मौजूद हैं।

उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग 10 वर्षों से वह अपने पति से अलग रह रही हैं और अपने बच्चों की परवरिश स्वयं कर रही हैं। ऐसे में उनके अनुसार प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

रज्जी ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं तो उसका प्रभाव उस संपत्ति पर नहीं पड़ना चाहिए जिसका स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है।

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर से पहले जारी हुआ था नोटिस

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई से पहले ढाबा संचालक को आधिकारिक नोटिस भेजा गया था। नोटिस में कथित अवैध निर्माण को हटाने या स्पष्टीकरण देने के लिए समय दिया गया था।

हालांकि रज्जी का आरोप है कि नोटिस उसके पति धर्मेंद्र सिंह के नाम पर जारी किया गया था, जबकि वह पिछले कई वर्षों से वहां नहीं रहता। उनका कहना है कि यदि संपत्ति उनके नाम पर है तो नोटिस भी उन्हें ही दिया जाना चाहिए था।

यही वजह है कि अब यह मामला कानूनी विवाद का रूप ले सकता है और आगे अदालत में भी पहुंच सकता है।

दो साल पहले भी हुई थी तोड़फोड़

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर पहली बार नहीं चला

रज्जी के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने ढाबे के खिलाफ कार्रवाई की हो। उन्होंने बताया कि लगभग दो साल पहले भी प्रशासन ने यहां तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी।

उस कार्रवाई के करीब सात से आठ महीने बाद उन्होंने दोबारा दीवार और अन्य निर्माण कार्य करवाया था। अब एक बार फिर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर निर्माण को ध्वस्त कर दिया है।

रज्जी का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और उनकी बात सुने बिना कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल रहा तैनात

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर चलाने के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

मौके पर चार अलग-अलग थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस का कहना है कि उनकी भूमिका केवल सुरक्षा प्रदान करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना थी।

कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विरोध या हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कर ली गई।

आगे क्या हो सकता है?

रज्जी ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने वकील को दे दी है और वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही हैं। यदि संपत्ति स्वामित्व और नोटिस प्रक्रिया को लेकर कोई कानूनी खामी साबित होती है तो मामला अदालत में जा सकता है।

दूसरी ओर प्रशासन अपने कदम को पूरी तरह वैध और नियमों के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत या संबंधित विभाग इस विवाद पर क्या फैसला लेते हैं।

जालंधर में नशा तस्कर के ढाबे पर बुलडोजर कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रशासन इसे अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ढाबा संचालक की पत्नी संपत्ति के स्वामित्व और नोटिस प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जता रही हैं। फिलहाल मामला प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित कानूनी लड़ाई के बीच खड़ा है, जिस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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