भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद: नीली जर्सी बदली, खेल या सियासत? जानिए पूरा मामला
30,JULY,2026
भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आगामी FIH हॉकी वर्ल्ड कप से पहले भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (ऑरेंज) रंग की जर्सी पहनाने के फैसले ने खेल के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। जहां एक ओर विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है, वहीं हॉकी इंडिया इसे पूरी तरह तकनीकी और खिलाड़ियों के हित में लिया गया निर्णय बता रहा है।
भारतीय हॉकी टीम की पहचान कई दशकों से नीली जर्सी रही है। ओलंपिक, एशियन गेम्स और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में भारतीय खिलाड़ी अक्सर इसी रंग की जर्सी में मैदान पर नजर आए हैं। ऐसे में जर्सी के रंग में बदलाव ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है

।
भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद पर विपक्ष के सवाल
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की पहचान केवल रंग बदलने से नहीं बदलती। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इतिहास और संस्थानों को बदलने की कोशिश की गई और अब राष्ट्रीय खेलों की पहचान भी बदली जा रही है। विपक्ष के कई नेताओं ने इसे “भगवाकरण” से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
विपक्ष का कहना है कि भारतीय हॉकी की नीली जर्सी केवल एक रंग नहीं बल्कि देश की खेल विरासत और पहचान का हिस्सा रही है। इसलिए इस बदलाव के पीछे की मंशा को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
हॉकी इंडिया ने क्या कहा?
भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद पर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला पूरी तरह तकनीकी आधार पर लिया गया है। संस्था के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने कहा कि अधिकांश अंतरराष्ट्रीय हॉकी टर्फ नीले रंग के होते हैं। ऐसे में नीली जर्सी पहनने वाले खिलाड़ियों की पहचान करना दर्शकों, मैच अधिकारियों और प्रसारण टीम के लिए मुश्किल हो सकता है।
हॉकी इंडिया के मुताबिक खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ की सलाह के बाद ऐसा रंग चुना गया जो मैदान पर अधिक स्पष्ट दिखाई दे। संस्था ने यह भी कहा कि इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा की प्रतिक्रिया
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नीली जर्सी भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान रही है और यदि इसे बदला जा रहा है तो इसके पीछे ठोस और स्पष्ट कारण होने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय हॉकी इंडिया का है।
पहले भी बदल चुकी है भारतीय टीम की जर्सी
हॉकी इंडिया ने यह भी याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम की जर्सी के रंग में बदलाव हुआ हो। वर्ष 2014 में टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 में आसमानी नीले रंग की जर्सी का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए मौजूदा बदलाव को संस्था एक सामान्य प्रक्रिया बता रही है।
क्या खेल के मैदान तक पहुंच गई राजनीति?
भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद अब केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है। एक पक्ष इसे खिलाड़ियों की सुविधा और बेहतर दृश्यता से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राष्ट्रीय पहचान और राजनीति से जोड़कर देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों से जुड़े फैसलों को राजनीतिक चश्मे से देखने की बजाय उनके तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। वहीं आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रीय टीम की पहचान में बदलाव हमेशा व्यापक चर्चा का विषय बनता है।
आगामी वर्ल्ड कप पर रहेंगी सभी की नजरें
अब सभी की निगाहें आगामी FIH हॉकी वर्ल्ड कप पर टिकी हैं। यदि भारतीय टीम नई जर्सी में शानदार प्रदर्शन करती है तो संभव है कि यह विवाद धीरे-धीरे शांत हो जाए। वहीं यदि प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा तो यह बहस और तेज हो सकती है।
फिलहाल भारतीय हॉकी भगवा जर्सी विवाद देश की सबसे चर्चित खेल और राजनीतिक बहसों में शामिल हो चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा केवल जर्सी के रंग तक सीमित रहता है या फिर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विषय बन जाता है।

vidIQ

