Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई: 43 हजार से अधिक नाम हटे, 1 लाख से ज्यादा राशन कार्ड जांच के दायरे में
जम्मू-कश्मीर में Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ा खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘राइटफुल टार्गेटिंग’ अभियान के दौरान अब तक 43,183 अपात्र राशन कार्ड लाभार्थियों के नाम डेटाबेस से हटाए जा चुके हैं। वहीं 1,11,057 राशन कार्ड अभी भी सत्यापन के लिए चिन्हित किए गए हैं। इस डिजिटल अभियान का उद्देश्य केवल पात्र लोगों तक सरकारी खाद्यान्न का लाभ पहुंचाना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई में 43 हजार से अधिक नाम हटाए गए
सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में डिजिटल सत्यापन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हुई, जो सरकारी मानकों के अनुसार राशन लेने के पात्र नहीं थे। जांच पूरी होने के बाद 43,183 अपात्र लाभार्थियों के नाम राशन कार्ड डेटाबेस से हटा दिए गए।
इसी अभियान के तहत लद्दाख में भी 3,529 मामलों को जांच के लिए चिन्हित किया गया, जबकि 677 अपात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए गए। सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचेगा।
1 लाख से अधिक राशन कार्ड मामलों की जांच अभी जारी
अभी भी 1,11,057 राशन कार्ड मामलों की जांच लंबित है। इन मामलों का सत्यापन रियल-टाइम डिजिटल सिस्टम के माध्यम से किया जा रहा है।
जांच के दौरान लाभार्थियों की जानकारी का मिलान कई सरकारी विभागों के डेटाबेस से किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय
- आयकर विभाग
- जीएसटी नेटवर्क (GSTN)
- सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS)
- वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड
- कृषि मंत्रालय
- ईपीएफओ (EPFO)
- गृह मंत्रालय
- रक्षा मंत्रालय
- भारतीय रेलवे
- डाक विभाग
इस डिजिटल प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी अपात्र व्यक्ति सरकारी राशन योजना का अनुचित लाभ न उठा सके।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि 43 हजार से अधिक अपात्र लाभार्थियों की पहचान और एक लाख से ज्यादा मामलों का सत्यापन लंबित होना यह संकेत देता है कि राशन वितरण व्यवस्था में लंबे समय से निगरानी की कमी रही है। इससे भविष्य में और भी बड़े स्तर पर सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्रदेश को हर वर्ष मिलता है लाखों टन खाद्यान्न
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत जम्मू-कश्मीर को वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक हर वर्ष 4.69 लाख टन खाद्यान्न आवंटित किया गया है।
वहीं लद्दाख को हर साल 9,444 टन खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत केंद्र सरकार ने खाद्यान्न परिवहन और उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) के डीलरों के मार्जिन के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की।
सहायता राशि इस प्रकार रही—
- 2023-24: 139.96 करोड़ रुपये
- 2024-25: 89.82 करोड़ रुपये
- 2025-26: 54.54 करोड़ रुपये
लद्दाख को वर्ष 2023-24 में 1.38 करोड़ रुपये की सहायता मिली, जबकि अगले दो वर्षों में कोई अतिरिक्त सहायता दर्ज नहीं की गई।
2025-26 में बढ़ा खराब खाद्यान्न का आंकड़ा
एक ओर जहां Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई जारी है, वहीं खाद्यान्न के खराब होने के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 0.82 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब या वितरण के अयोग्य घोषित किया गया। यह मात्रा वर्ष 2024-25 में दर्ज 0.09 मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 9 गुना अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार—
- 2021-22: 261 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब
- 2022-23: 248 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब
- 2023-24: कोई नुकसान दर्ज नहीं
- 2024-25: 0.09 मीट्रिक टन
- 2025-26: 0.82 मीट्रिक टन
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में खाद्यान्न बाढ़, भारी बारिश, परिवहन के दौरान नुकसान, गुणवत्ता संबंधी शिकायतों, तकनीकी समस्याओं और आग जैसी घटनाओं के कारण वितरण योग्य नहीं रह जाता।
‘डिपो दर्पण पोर्टल’ से होगी बेहतर निगरानी
खाद्यान्न के नुकसान को रोकने और भंडारण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘डिपो दर्पण पोर्टल’ शुरू किया है।
इस पोर्टल पर गोदाम प्रबंधकों को जियो-टैगिंग के साथ गोदामों की स्थिति, बुनियादी ढांचे और संचालन संबंधी जानकारी अपलोड करनी होती है। सरकार का दावा है कि इससे भंडारण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में खाद्यान्न के नुकसान को कम किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
Ration Card धारकों पर बड़ी कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि 43 हजार से अधिक अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए जाने और 1 लाख से ज्यादा मामलों की जांच लंबित होने से यह भी स्पष्ट होता है कि राशन वितरण प्रणाली में अभी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। आने वाले समय में डिजिटल सत्यापन और सख्त निगरानी के जरिए वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी खाद्यान्न पहुंचाने की कोशिश और तेज होने की उम्मीद है।

