NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद: NTA की बड़ी चूक, नागपुर के छात्र का सेंटर पहुंचा अबू धाबी, राहुल गांधी ने उठाए सवाल
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG री-एग्जाम परीक्षा से पहले नागपुर के एक छात्र के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र भारत की बजाय अबू धाबी (यूएई) दिखाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद छात्र, उसके परिवार और शिक्षा जगत में चिंता का माहौल बन गया है।
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पंजाब कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस मुद्दे पर NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं एजेंसी ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए जल्द सुधार का आश्वासन दिया है।
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद क्या है?
जानकारी के अनुसार नागपुर निवासी छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब ने जब NEET UG री-एग्जाम का एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें उसका परीक्षा केंद्र अबू धाबी दर्शाया गया। छात्र और उसके परिवार के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था।
परिजनों का कहना है कि उनके पास न तो पासपोर्ट है और न ही इतनी कम अवधि में विदेश जाकर परीक्षा देने की कोई व्यवस्था संभव है। परीक्षा से ठीक पहले सामने आई इस गलती ने पूरे परिवार को तनाव में डाल दिया।
परिवार की बढ़ी चिंता
छात्र के परिवार ने बताया कि वह पिछले कई सप्ताह से परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था। लेकिन एडमिट कार्ड में विदेश का सेंटर देखकर वह मानसिक रूप से परेशान हो गया। परिवार के मुताबिक छात्र पूरी रात तनाव में रहा और परीक्षा देने को लेकर भी असमंजस में पड़ गया।
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद पर राहुल गांधी का हमला
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि जिस छात्र के पास न पासपोर्ट है, न विदेश जाने के साधन हैं, उसे अंतिम समय में विदेश में परीक्षा केंद्र दे दिया गया। राहुल गांधी ने सवाल किया कि आखिर ऐसी गलती हुई कैसे और छात्रों को इस तरह के मानसिक तनाव से क्यों गुजरना पड़ रहा है।
उन्होंने लिखा कि देश के बच्चे और उनके माता-पिता एक जिम्मेदार तथा जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था के हकदार हैं। परीक्षा प्रणाली में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं युवाओं का विश्वास कमजोर कर रही हैं।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी जताई नाराजगी
पंजाब कांग्रेस के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इस मामले को लेकर NTA की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इसे केवल “टेक्निकल ग्लिच” कहकर टाला नहीं जा सकता।
उनका कहना था कि छात्रों के लिए यह कोई सामान्य तकनीकी समस्या नहीं बल्कि उनके वर्षों की मेहनत, समय और करियर से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की।
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद पर NTA का जवाब
तकनीकी त्रुटि मानकर सुधार का आश्वासन
मामले के सामने आने के बाद NTA ने स्वीकार किया कि यह एक तकनीकी गलती थी। एजेंसी के अनुसार सिस्टम में आई खराबी के कारण छात्र का परीक्षा केंद्र गलत दिखाया गया।
NTA ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामले की तत्काल जांच शुरू कर दी गई है और छात्र को नागपुर में ही नया परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। एजेंसी ने परिवार को ईमेल भेजकर भरोसा दिलाया है कि संशोधित एडमिट कार्ड जल्द जारी कर दिया जाएगा।
बार-बार विवादों में क्यों घिर रही परीक्षा एजेंसियां?
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर तकनीकी खामियां, पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों की समस्याएं और प्रशासनिक गड़बड़ियां लगातार चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद ने परीक्षा प्रबंधन की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET के संचालन में अत्यधिक सावधानी और मजबूत तकनीकी निगरानी की आवश्यकता है ताकि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
NEET री-एग्जाम सेंटर विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की परीक्षा प्रणाली छात्रों को सुरक्षित, पारदर्शी और तनावमुक्त माहौल उपलब्ध करा पा रही है। नागपुर के छात्र को अबू धाबी परीक्षा केंद्र आवंटित होने की घटना भले ही तकनीकी त्रुटि बताई जा रही हो, लेकिन इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब सभी की नजर NTA की कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।

