Monsoon 2026: IMD Alert, देश में 42% बारिश की कमी, मॉनसून पर मंडरा रहा संकट

Monsoon 2026 इस समय देश के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है और देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। 4 जून से 18 जून के बीच पूरे भारत में बारिश की कमी बढ़कर 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह स्थिति कृषि, जल संसाधनों और आम जनजीवन के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
IMD के अनुसार, इस अवधि में सामान्य रूप से 72.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक बारिश केवल 42.1 मिलीमीटर दर्ज की गई। मॉनसून की शुरुआत के शुरुआती दो सप्ताह में ही इतनी बड़ी कमी मौसम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
Monsoon 2026 में बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता
देशभर के बारिश संबंधी आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर चिंताजनक दिखाई देती है। मध्य भारत, पूर्वी भारत और प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्सों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं कई जिलों में बारिश की कमी 60 से 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह अतिरिक्त बारिश देशव्यापी कमी की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मॉनसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ फसलों की बुवाई पर असर पड़ सकता है।
Monsoon 2026 पर Western Disturbance का असर
18 जून को जारी INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों ने मॉनसून की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट किया है। तस्वीरों में पश्चिमी हिमालय और उससे सटे उत्तरी क्षेत्रों में घने बादल दिखाई दिए, जो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से जुड़े हुए हैं।
इसके विपरीत मध्य भारत, महाराष्ट्र, गुजरात और मॉनसून के मुख्य क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बादलों से लगभग मुक्त दिखाई दिया। अरब सागर शाखा कमजोर बनी हुई है और पश्चिमी तट पर गहरे बादलों का विकास सीमित है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बार-बार सक्रिय हो रहे Western Disturbances मॉनसून की सामान्य प्रगति में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। इसके कारण नमी वाली हवाएं मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही हैं।
Monsoon 2026 में महाराष्ट्र और मध्य भारत की स्थिति
बारिश की कमी का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र में कई क्षेत्रों में गंभीर वर्षा घाटा दर्ज किया गया है। मुंबई में जून का महीना पिछले एक दशक के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल हो गया है।
स्थिति को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में जल संरक्षण और पानी की खपत पर नियंत्रण संबंधी कदम उठाए गए हैं। विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में किसान मॉनसून की वापसी और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो फसलों की बुवाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
Monsoon 2026 के लिए आगे क्या है अनुमान?
मौसम विभाग के अनुसार अब सबसे बड़ी चुनौती समय की है। जून का दूसरा पखवाड़ा शुरू हो चुका है और बारिश की मौजूदा कमी को पूरा करने के लिए मॉनसून को तेजी से सक्रिय होना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों से मजबूत नमी का प्रवाह आवश्यक है। इसके साथ ही किसी मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure System) के बनने की भी आवश्यकता है, जिससे व्यापक स्तर पर बारिश हो सके।
हालांकि वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों और मौसम संकेतकों से फिलहाल मॉनसून के बड़े पैमाने पर सक्रिय होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। यदि अगले सप्ताह तक कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं होती है तो जून के अंत तक बारिश की कमी बनी रह सकती है।
Monsoon 2026: किसानों और जल संसाधनों के लिए चुनौती
Monsoon 2026 की धीमी प्रगति ने किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। देश में 42 प्रतिशत बारिश की कमी यह संकेत देती है कि मॉनसून अभी भी अपनी सामान्य स्थिति से पीछे चल रहा है। आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियां यह तय करेंगी कि देश इस कमी को पूरा कर पाएगा या नहीं।
फिलहाल सभी की नजरें अगले सप्ताह बनने वाली संभावित मौसम प्रणालियों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही प्रणालियां भारत में मॉनसून को नई गति दे सकती हैं और बारिश की कमी को कम करने में मदद कर सकती हैं।

