सतलुज फिल्म विवाद: AAP ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- पंजाब के इतिहास को दबाने की कोशिश

सतलुज फिल्म विवाद को लेकर पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार, भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के पंजाब प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने आरोप लगाया कि यह कदम पंजाब के इतिहास और 1980-90 के दशक की घटनाओं को दबाने की कोशिश है।
अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धालीवाल ने कहा कि मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फिल्म को पहले सिनेमाघरों में रिलीज नहीं होने दिया गया और अब उसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से भी हटा दिया गया। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
सतलुज फिल्म विवाद पर AAP का बड़ा बयान
सतलुज फिल्म विवाद पर बोलते हुए कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि किसी भी फिल्म को केवल इसलिए रोकना उचित नहीं है क्योंकि वह इतिहास के किसी संवेदनशील दौर को सामने लाती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के कठिन दौर से जुड़े तथ्यों को लोगों तक पहुंचने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
धालीवाल ने सवाल उठाया कि यदि कोई फिल्म मानवाधिकारों और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है, तो उसे लोगों तक पहुंचने से क्यों रोका जा रहा है। उनके अनुसार, जनता को इतिहास जानने और समझने का अधिकार है।
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म
सतलुज फिल्म विवाद की वजह बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित बताई जा रही है।
AAP का कहना है कि खालड़ा ने मानवाधिकारों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया था और उनके जीवन पर आधारित फिल्म समाज के सामने ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। पार्टी का आरोप है कि ऐसी फिल्मों को रोकना इतिहास को दबाने जैसा कदम है।
कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुलदीप सिंह धालीवाल ने सतलुज फिल्म विवाद को लेकर कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल तीनों पर राजनीतिक हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के उस दौर से जुड़े कई सवालों पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं। धालीवाल ने कहा कि इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता और सच्चाई किसी न किसी रूप में सामने आती ही है।
सुखबीर सिंह बादल पर भी लगाए आरोप
धालीवाल ने खालड़ा परिवार के हालिया बयानों का हवाला देते हुए शिरोमणि अकाली दल और उसके नेता सुखबीर सिंह बादल पर भी निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि उस समय विवादों में रहे कुछ पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण दिया गया था। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिल्म की टीम और दिलजीत दोसांझ को समर्थन
सतलुज फिल्म विवाद के बीच AAP ने फिल्म की टीम, अभिनेता दिलजीत दोसांझ और निर्माताओं को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया।
धालीवाल ने कहा कि यदि फिल्म को दोबारा रिलीज कराने के लिए किसी कानूनी लड़ाई या जन आंदोलन की जरूरत पड़ी, तो आम आदमी पार्टी हर संभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति का सम्मान होना चाहिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
AAP का कहना है कि किसी फिल्म या साहित्यिक कृति पर प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
धालीवाल ने कहा कि यदि कोई फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करती है, तो उस पर रोक लगाने के बजाय लोगों को स्वयं निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में विचारों और इतिहास पर खुली चर्चा आवश्यक है।
सतलुज फिल्म विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज
सतलुज फिल्म विवाद के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
यह मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इतिहास और राजनीतिक जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
सतलुज फिल्म विवाद ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी ने फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने का विरोध करते हुए इसे इतिहास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश बताया है। वहीं, इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

