हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री पर इजरायली सेना का कब्जा, 50 ड्रोन और 8 टन विस्फोटक बरामद
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री को लेकर इजरायली सेना (IDF) ने बड़ा दावा किया है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल ने कहा है कि उसकी सेना ने दक्षिणी लेबनान में एक विशाल भूमिगत सैन्य परिसर का पता लगाया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रोन निर्माण, हथियार भंडारण और इजरायल की ओर हमले करने की तैयारी के लिए किया जाता था। इजरायली सेना के अनुसार इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में ड्रोन, विस्फोटक सामग्री और सैन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि कई क्षेत्रों में युद्धविराम लागू है, लेकिन सीमा क्षेत्र में समय-समय पर झड़पों और सैन्य गतिविधियों की खबरें आती रही हैं। ऐसे माहौल में इस कथित खोज ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री कहां मिली?
इजरायली सेना के मुताबिक यह कथित हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री दक्षिणी लेबनान के मजदल जौन क्षेत्र के नीचे स्थित थी। सेना का दावा है कि यह परिसर इजरायली सीमा से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ के भीतर बनाया गया था।
IDF के अनुसार यह सुविधा जमीन से लगभग 29 मीटर नीचे स्थित थी और सुरंगों का नेटवर्क पहाड़ के अंदर सैकड़ों मीटर तक फैला हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि परिसर को अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, स्टील के विस्फोटरोधी दरवाजों और कई सुरक्षा स्तरों से सुरक्षित किया गया था।
इजरायली सेना का दावा है कि हाल ही में क्षेत्र में नियंत्रण स्थापित करने के बाद उन्हें इस भूमिगत नेटवर्क की जानकारी मिली।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री में क्या-क्या मिला?
इजरायली अधिकारियों के अनुसार परिसर के अंदर कई ऐसे कमरे मिले जहां कथित रूप से ड्रोन असेंबली का काम किया जाता था। सेना का कहना है कि यहां ईरान से लाए गए पुर्जों की मदद से ड्रोन तैयार किए जाते थे।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री से 50 ड्रोन बरामद
IDF के अनुसार इस अभियान के दौरान लगभग 50 ड्रोन बरामद किए गए। दावा किया गया है कि इनमें से कई ड्रोन विस्फोटक सामग्री ले जाने में सक्षम थे और उनका उपयोग हमलों के लिए किया जा सकता था।
सेना का यह भी कहना है कि बरामद ड्रोन उन मॉडलों से मिलते-जुलते हैं जिनका इस्तेमाल अतीत में इजरायल पर हमलों में किया गया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
8 टन विस्फोटक सामग्री मिलने का दावा
इजरायली सेना ने दावा किया है कि परिसर के भीतर लगभग 8 टन विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार यह विस्फोटक सामग्री विभिन्न सैन्य अभियानों और ड्रोन संचालन के लिए इस्तेमाल की जा सकती थी।
इसके अलावा सुरंगों में कई हथियार, संचार उपकरण और अन्य सैन्य संसाधन भी मिलने की बात कही गई है।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री से ड्रोन लॉन्च करने की व्यवस्था
इजरायली सेना ने इस परिसर को केवल ड्रोन फैक्ट्री ही नहीं बल्कि एक भूमिगत एयरबेस भी बताया है। IDF का दावा है कि पहाड़ के दक्षिणी हिस्से में विशेष लॉन्चिंग शाफ्ट बनाए गए थे, जिनके माध्यम से ड्रोन सीधे इजरायल की दिशा में भेजे जा सकते थे।
इंजीनियरिंग इकाइयों के अनुसार सुरंगों के अंतिम हिस्से में कई निकास द्वार भी मौजूद थे। इन निकास मार्गों को भारी विस्फोटरोधी दरवाजों से सुरक्षित रखा गया था ताकि किसी हमले की स्थिति में संचालन जारी रखा जा सके।
इस तरह की संरचना यह संकेत देती है कि परिसर को लंबे समय तक सैन्य उपयोग के लिए तैयार किया गया था।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री को लेकर इजरायल का बड़ा आरोप
इजरायली अधिकारियों का आरोप है कि यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग एक दशक के दौरान विकसित किया गया था और इसमें ईरान की वित्तीय, तकनीकी तथा सैन्य सहायता शामिल थी।
हालांकि इन आरोपों पर न तो हिजबुल्लाह और न ही ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
यही वजह है कि इस मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री को ध्वस्त करने की तैयारी
इजरायली सेना का कहना है कि पूरे भूमिगत नेटवर्क की स्कैनिंग और जांच पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार अब खुफिया जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस कथित सैन्य परिसर को नष्ट किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह लेबनान-इजरायल सीमा क्षेत्र में सक्रिय सैन्य नेटवर्क को लेकर एक बड़ी सुरक्षा चुनौती का संकेत हो सकता है।
हिजबुल्लाह हथियार फैक्ट्री को लेकर इजरायली सेना के दावे ने मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। 50 ड्रोन, 8 टन विस्फोटक और भूमिगत सुरंग नेटवर्क की बरामदगी के दावों ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और हिजबुल्लाह या ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

